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Monday, May 13, 2013

अक्षय तृतीया

Lord Vishnu

वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया या आखातीज कहते है। अक्षय का शाब्दिक अर्थ होता है जिसका कभी नाश न हो। स्थायी वही रह सकता है जो सर्वदा सत्य हो।
इसी दिन से त्रेता युग का आरंभ हुआ था। इस तिथि को भगवान बद्रीनाथ के पट भी खुलते है। आज के दिन ही साल भर में एक बार वृन्दावन में श्री बिहारीजी के चरणों के दर्शन होते है।
आखातीज एक सामाजिक पर्व भी है। इस दिन बिना मुहूर्त देखे सभी शुभ कार्य आरंभ किए जा सकते है। आज का दिन हमारे आत्म विश्लेषण करने का दिन है। हमें इस दिन स्वयं का अवलोकन और आत्मविवेचन करना चाहिए। हमें आज के दिन अहंकार, स्वार्थ, काम, क्रोध, लोभ और बुरे विचारों को छोड़कर सकारात्मक चिंतन करना चाहिए जिससे हमें शांति व दिव्य गुण मिल सके। 
इस दिन दिया हुआ दान अक्षय हो जाता है। इस तिथि पर दही, चावल-दूध से बने व्यंजन, खरबूज, तरबूज और लड्डू का भोग लगाकर दान करने का विधान है। 
आज के दिन ही महात्मा परशुरामजी का जन्म हुआ था। वे भगवान विष्णु के अवतार है। रेणुका पुत्र परशुरामजी ब्राम्ह्ण होते हुए भी क्षत्रिय स्वभाव के थे। सहस्त्रार्जुन ने उनके पिताजी जमदग्नि का वध कर दिया था, जिससे क्रोध में आकर परशुरामजी ने पृथ्वी को दुष्ट क्षत्रिय राजाओं से मुक्त किया था। भगवान शिव के दिये हुए अमोघ अस्त्र परशु को धारण करने के कारण इनका नाम परशुराम पड़ा था। 
- (धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार)

Friday, April 19, 2013

श्री रामनवमी

Shree Ram Darbar (Lord Rama, Lakshman, Sita & Hanuman)

आज रामनवमी का पर्व है। आप सभी को इस अवसर पर बहुत-२ शुभकामनाएं। इस पर्व के महत्व को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से मैं यह लेख लिख रही हूँ। आशा है यह  लेख आपको पसंद आएगा। अपनी टिप्पणियों (comments) द्वारा अपनी सोच मुझ तक पहुंचाइएगा। 

श्री रामनवमी सारे संसार के लिए सौभाग्य का दिन है क्योंकि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने रावण के वध, दानवों के विनाश और सनातन धर्म की रक्षा करने के लिए उन्होने धरती पर जन्म लिया था। 

श्रीराम के समान आदर्श पुरुष, पुत्र, शिष्य, पति, वीर, दयालु, सत्यवादी,  दृढ़ प्रतिज्ञ और संयमी जगत के इतिहास में कोई नहीं हुआ। साक्षात परम पुरुष परमात्मा होने पर भी श्रीराम ने सभी को सत्य की राह दिखलाने के लिए आदर्श लीलाएँ की, जिन्हें हम आसानी से अपने जीवन में अपना सकते है। सज्जनों की रक्षा के लिए स्वयं भगवान श्री हरि राम के रूप में अवतीर्ण हुए। 

श्री राम सर्वात्मा है, उनके जीवन का मंत्र था- "सभी को साथ लेकर चलने में ही सच्चा सुख है।" रामनवमी का पर्व हमें संदेश देता है 'अपने को शुद्ध करो ज्ञान की सीमा का विस्तार करो, सद्भाव, समभाव और सहभाव से अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाओ।' राम भक्ति में डूबकर राम बन जाओ। स्वयं आनंदित रहकर दूसरों को आनंदित करना ही राम का रामत्व है। 
- साधना

Friday, February 15, 2013

बसंत पंचमी महोत्सव

आज बसंत पंचमी का पर्व है। आप सभी को इस अवसर पर बहुत-२ शुभकामनाएं। इस पर्व के महत्व को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से मैं यह लेख लिख रही हूँ। आशा है यह  लेख आपको पसंद आएगा। अपनी टिप्पणियों (comments) द्वारा अपनी सोच मुझ तक पहुंचाइएगा।

माघ शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी का उत्सव मनाया जाता हैं। बसंत पंचमी के आते ही प्रकृति में नए परिवर्तन आने लगते हैं। दिन छोटे होते हैं, ठंड कम होने लगती हैं और पतझड़ शुरू हो जाता हैं। आम की मंजरियों पर भौरें मंडराने लगते है। जीवन में एक नया उत्साह और उमंग महसूस होने लगता हैं। 


इस दिन सरस्वती पूजन का विशेष महत्व हैं। माँ सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की देवी हैं। भगवान श्री कृष्ण के कंठ से उत्पन्न होने के कारण देवी का नाम सरस्वती हुआ। देवी सरस्वती ने ही संसार को निर्मल ज्ञान देकर इसका निर्माण किया हैं।

इस तिथि पर ही बच्चों का अक्षरज्ञान शुरू किया जाता हैं। पुस्तक और कलम में देवी सरस्वती का वास माना जाता हैं इसलिए पुस्तक और कलम की पूजा की जाती हैं। विद्या को सभी धनों में प्रधान धन कहा गया हैं। विद्या से ही ज्ञान प्राप्त होता हैं। माँ सरस्वती को प्रसन्न करके ही सभी महान ऋषियों ने सिद्धि को प्राप्त किया। विद्यार्थियों को विशेष रूप से माँ सरस्वती को प्रसन्न करना चाहिए ताकि वो अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त कर हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सके।

आशा है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। धन्यवाद
- साधना