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Sunday, February 17, 2013

आया बसंत...

Close up view of orchid at the Fairchild Tropical Garden in Miami, Florida

आया बसंत ले फिर नई उमंग उल्लास
धरती ने ली फिर अंगड़ाई बदला अपना रूप
मस्त पवन लहराने लगी लरज़ उठे उपवन, मधुबन
महक उठा तन-मन, सृष्टि मंत्रमुग्धसी हो गयी
वृक्षों ने नव कोपलों को धारण कर
बदल लिए अपने परिधान
नए-नए रंग के फूलों की चुनरी पहन
धरती नव यौवना सी इठलाने लगी
आम्र वृक्ष पर मंजरी से लदी डालियाँ झुकने लगी
कोयल कुहकने लगी
बुलबुल मीठे स्वर में अपने गीत गाने लगी
कलियों ने मुस्कुरा कर स्वागत किया
भौरों की गुंजार, तितलियों के मोहक रंग
मन को लुभाने लगे
खेतों में गेंहू, चना, सरसों, अलसी की फसलें लहराने लगी
आकाश पतंगों की रंगिनियों से भर गया
सुनहरे सूरज को देख, ठंड रज़ाई में जा दुबक गयी
मन अलमस्त हो झूमने लगा
आया बसंत... चाहत भरे दिलों मे अरमान जगाने
- साधना

Tuesday, January 22, 2013

पतंग

the girl, the kite
पतंग को उड़ता देख मन उड़ना चाहता था,
अनंत की ऊँचाइयों को छूना चाहता था,
मैंने माँ से पूछा- मैं उड़ना चाहती हूँ पतंग की तरह,
माँ ने कहा- पतंग की ऊँचाई एक नाज़ुक सी डोर से बंधी है,
जिसे काटने के लिए बहुत से लोग खड़े हैं,
माँ से मैंने कहा- तुम नहीं चाहती ऊँचाइयों को छूना,
उन्होनें मना किया कहा मेरी ऊँचाइयाँ,
मेरा घर-आँगन और परिवार हैं, बाहर काँटों से भरा संसार है, 
पर मेरा मन नहीं माना क्योंकि जब मैं छोटी थी,
और रोती थी तब माँ आसमान में उड़ती पतंगें व
परिंदों को दिखाकर मुझे चुप करती थी,
उसी वक़्त से मेरा मन उड़ना चाहता था, 
हर कामयाबी को हासिल करना चाहता था
एक दिन मैंने सपनों में बहुत सी रंग-बिरंगी पतंगें उड़ती देखी,
उन्होनें पूछा- तुम भी हमारे साथ हवा में उड़ोगी,
मैंने हामी भर दी पर जब आँखें खुली तो मैं ज़मी पर थी।
- साधना