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Sunday, May 12, 2013

प्यारी माँ...

Manon et Maman

माँ इस धरती पर मैं खाली हाथ ही आया था,
तुम्हारे ममता भरे आँचल में छुप कर,
मैंने सच्चा प्यार पाया था,
तुमसे महकी मेरे इस जीवन की बगिया,
जीवन के सारे रिश्ते तुमसे हैं,
इस जीवन की खुशी, चिंता, हल्ला-गुल्ला,
तनहाई तुम हो, नदिया, झरने, गहरा समंदर,
सावन-भादों, बसंती बयार तुम ही हो,
जीवन की हर सच्चाई तुम हो, 
तुम से ही है रिश्ते-नाते, मेरे जीवन की तुम्हीं विधाता,
तुमसे ही अस्तित्व है मेरा,
तुम हो मेरी प्यारी माँ... 
- साधना


Monday, March 25, 2013

होली

Color Washed Grainy Seamless Retro Patterns 4
निकली मस्तों की टोली
होली है भई होली है
शहर गाँव में शोर मचाते, गलियों और चौराहों पर
निकली मस्तों की टोली है
होली है भई होली है
उमंग उल्लास से भरे रंग हैं
चौराहों पर होलिका दहन है
भंग, ठंडाई की तरंग मे डूबे सब हमजोली हैं
गुझिया, लड्डू, पूरणपोली खाने में सब मस्त हैं
फागुन के रंगों मे रंगा मौसम भी अलमस्त है
कोयल कुहकी, बुलबुल चहकी
अलसी गेंहू की क्यारी भी रंगों मे डूबी
महुआ महका, आम मंजरियों से भौरें भी मदमस्त हैं
तरह-तरह के रंग हैं बिखरे, सारे के सारे मस्त हैं
जगह-जगह पर शोर हुआ, होली है भई होली है

- साधना

Monday, March 18, 2013

पलाश के फूल

गर्मी का मौसम आते ही,
खिल उठते है चटख रंग के पलाश के फूल,
मन और आँखें तृप्त हो जाती है फूलों को देखकर,
जीवन खुशी से सराबोर हो जाता,
हर पल उत्साह के साथ बासन्ती खुशियाँ मनाता,
भौरों की गुनगुनाहट और चिड़ियों की चहचहाहट को देख वृक्ष भी लहराता,
झूम-झूम कर हर आने-जाने वाले पंछी से बतियाता,
पर जब भी अपनी शाखों को पर्ण-विहीन पाता,
कुछ उदास सा हो जाता,
पर अपने आप को समझता कि खुशी के साथ गम,
मिलन के साथ जुदाई जुड़ी हुई है।
तभी एक नया पंछी डाल पर बैठ कर चहचहाता
और पलाश अपना गम भूल जाता...
- साधना

Sunday, February 17, 2013

आया बसंत...

Close up view of orchid at the Fairchild Tropical Garden in Miami, Florida

आया बसंत ले फिर नई उमंग उल्लास
धरती ने ली फिर अंगड़ाई बदला अपना रूप
मस्त पवन लहराने लगी लरज़ उठे उपवन, मधुबन
महक उठा तन-मन, सृष्टि मंत्रमुग्धसी हो गयी
वृक्षों ने नव कोपलों को धारण कर
बदल लिए अपने परिधान
नए-नए रंग के फूलों की चुनरी पहन
धरती नव यौवना सी इठलाने लगी
आम्र वृक्ष पर मंजरी से लदी डालियाँ झुकने लगी
कोयल कुहकने लगी
बुलबुल मीठे स्वर में अपने गीत गाने लगी
कलियों ने मुस्कुरा कर स्वागत किया
भौरों की गुंजार, तितलियों के मोहक रंग
मन को लुभाने लगे
खेतों में गेंहू, चना, सरसों, अलसी की फसलें लहराने लगी
आकाश पतंगों की रंगिनियों से भर गया
सुनहरे सूरज को देख, ठंड रज़ाई में जा दुबक गयी
मन अलमस्त हो झूमने लगा
आया बसंत... चाहत भरे दिलों मे अरमान जगाने
- साधना

Tuesday, February 12, 2013

प्रवासी पक्षी

Marshland and migratory birds at Lake Havasu national wild-life refuge, which is about equally divided between California and Arizona. The lake is fed by the Colorado River, May 1972
बसंत की आहट पाते ही नन्हे पक्षी प्रवास से लौट आए,
कभी पेड़ों पर कभी झड़ियों में कभी बिजली के तारों पर,
कतार लगा मीठे-मीठे स्वर में मन को लुभाने लगे,
पेड़ों पर नए नीड़ बनाने लगे,आकाश में उड़ान भर-भर के,
नए तरीकों से अपना आशियाना बनाने लगे,
नर्म-नर्म रोओं से भरे अपने बच्चों को,
दूर-दूर से ला भोजन करा उन्हें उड़ना सिखाने लगे,
कुछ नन्हे पंछी उड़ान भरना सीखने लगे,
तभी अचानक एक आँधी सी आई,
टूट गए सारे स्वप्न बिखर गया नीड़,
नन्हें-नन्हें पंखों से ढके बच्चे जमीन पर गिर बेसहारा हो गए,
उड़ गए प्रवासी पक्षी फिर लौट कर आने के लिए।
- साधना