सोचा न था जिंदगी इतनी उलझनों से भरी होगी
हर कदम पर मुसीबतें होंगी
अपनों से इतने गम मिलेगें कि दुश्मनों की जरुरत ही न होगी
जिंदगी का हर लम्हा डर के साए से होकर गुजरता है,
न जाने किस मोड़ पर जिंदगी डगमगा जाये
और कोई अपना दूर तक नज़र न आये
दर्द के सायों में गुम हो ये जिंदगी,
ऐसे ही एक दिन हमेशा के लिए गुजर जाए...
- साधना
No comments:
Post a Comment