Showing posts with label कान्हा. Show all posts
Showing posts with label कान्हा. Show all posts

Monday, June 24, 2013

मेरा मन...

krishna

कान्हा,
मेरा मन करुण क्रंदन कर,
दुख भरी आवाज़ से तुम्हें पुकारता है,
मेरे मन की हलचल में,
दुख भरे आँसू है,
तुमने वचन दिया था कि,
जब भी यह संसार दुखों में डूब रहा होगा,
धर्म अधर्म में बदलने लगेगा,
तुम रूप बदलकर लौट आओगे,
इस संसार कि डूबती नैया पार लगाने,
मैं ये भी जानती हूँ, 
दुखों से दूर भागना,
दुख दूर करने का हल नहीं है,
स्वयं सामना करना होगा,
तभी सुख लौटेगा,
फिर भी आंसुओं से डबडबाई,
आँखों से मैं तुम्हारी राह तकती रहती हूँ...   

- साधना  

Monday, May 6, 2013

विनती

Krishna-I

कान्हा,
मैं जानती हूँ कभी किसी दिन मुझे इस संसार से
विदा होना होगा सूर्य अस्त हो रहा होगा,
पंछी अपने घरोंदों में लौट रहे होंगे और,
मैं अंधेरों में डूब जाऊँगी
तुमसे सिर्फ इतनी विनती है कि
संसार से जाने के पहले मैं अपने भाव तुम्हें,
समर्पित कर सकूँ, तुम्हारे दर्शन के लिए,
दीप जला सकूँ और एक पुष्प हार बनाकर,
तुम्हें अर्पित कर सकूँ, ताकि मेरा जीवन,
सफल हो जाएँ...
- साधना