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Monday, March 2, 2015

फागुन के दिन



फागुन की तेज धूप से दिन अलसाये हुए अजगर से हो गए
चारों तरफ सन्नाटा सा है, 
सिर्फ सूखे पत्तों के झड़ने की आवाज सुनाई देती है, 
सड़के सूनी हो चली है, सब कुछ शांत-सा नज़र आता
लेकिन फागुन की रातों में ग्रामीण अंचलों से
फाग के गीतों की सुरीली मस्ती-भरी आवाज, 
मांडल, ढोल व बाँसुरी के मीठे स्वरों को सुन 
थके मांदे लोग भूल जाते है अपनी दिन भर की थकान व सूनापन 
और डूब जाते है आनंद के गहरे समुन्दर में नृत्य करते करते...

- साधना 

Thursday, March 21, 2013

पतझड़

Autumn in Novosibirsk
पेड़ों के पत्ते झड़ गए पतझड़ का आव्हान हुआ,
सूरज की तपती किरणों ने गर्मी का आव्हान किया,
पशु-पक्षी सब घबरा उठे, ताल-तलैया लगे सूखने,
बढ़ती गर्मी की तपन ने पंखों व ए.सी. का आव्हान किया,
सारा दिन भट्टी-सा तपता, लू ने सभी को परेशान किया,
सब डरते-डराते घर में छुपते, हर कोई हैरान हुआ,
सांझ के ढलते ही छत पर पहुँच हर व्यक्ति ने,
चंद्रमा की शीतल किरणों व मंद पवन का आव्हान किया।
पेड़ों के पत्ते झड़ गए...
- साधना