बचपन में हर पल प्यार मिला, दुलार मिला अपनों का,
फुर्र-फुर्र उड़ते पंछी-सा बीत गया बचपन,
बचपन के जाते ही जीवन कभी-इधर, कभी-उधर डगमगाने लगा,
सीमित होने लगे पल, दुख-सुख लगे घेरने,
रोक-टोक लगने लगी हर पल,
ये करो-ये ना करो की आवाजें आने लगी,
मन बैचेन होने लगा छटपटाने लगा,
फिर कहीं से स्नेह से भरे बोल सुन बैचेनी खत्म हुई,
जीवन नई तरंगों से भर उठा,
मन आभार प्रकट करने लगा उन स्नेह से भरे शब्दों का,
यदि न मिल पाता स्नेहपूर्ण साथ,
तो जीवन नीरस होकर अतृप्त सा रह जाता...
- साधना
शब्द कमाल के जादूगर होते है,
पल-पल में अपना रूप बदलते है,
ज़रा भी गलत प्रयोग होते ही अर्थ को अनर्थ में बदल देते,
कभी अपने को पराया बना देते, तो कभी पराए को अपना बना लेते,
कभी छुपे हुए मनोभावों को व्यक्त कर देते,
कभी दिल में भरे गुबार को बाहर निकाल डालते,
कुछ अनकही बातों को कह जाते,
ईश्वर के समक्ष प्रार्थना बन प्रकट हो जाते,
शब्द के गूंजने से सजीव हो उठता यह मूक संसार,
जोश में भरे शब्द क्रांति का आव्हान करते,
सांत्वना में डूबे शब्द घाव पर मरहम लगाते,
प्यार में डूबे दो शब्द हर शख्स को अपना बना डालते,
नफरत में डूबे शब्द हिंसा-अलगाव को जन्म देते,
रोते हुए शिशु के लिए लोरी बन जाते ,
सुर-ताल के संग मिलकर गीत बन जाते,
ॐ की ध्वनि के साथ मिल मंत्र बन जाते
साधको को सिद्धि प्रदान करते ये शब्द,
शब्दों के बिना जीवन का सफर अधूरा है,
इसलिए शब्द जीवन और जीवन शब्द है।
- साधना