Wednesday, March 19, 2014

खुशी
















Photo taken from: Dhinakaran Gajavarathan's Flickr Photostream

जीवन मे हर पल गमों को
भूलने के लिए भटकते रहे
खुशियाँ ढूंढते रहे
पर खुशियाँ नहीं मिली
परेशान होकर तब पलकें मूंदकर
हम बैठ गए वीराने में
जब चिड़ियों के कलरव से हम जागे
खुशियाँ थी चारों तरफ
सूरज की किरणों में,
चंद्रमा की चाँदनी में,
ठंडी-ठंडी बयार में,
कोयल की कूक में,
ठंडे शीतल जल में,
मयूर के कलात्मक नृत्य में,
चारों तरफ आनंद ही आनंद था,
और हर कोई अपनी-अपनी
तकलीफ़ों को भुला कर
तरह-तरह से खुशियाँ बिखेर,
खुश हो रहा था...
- साधना

Monday, March 17, 2014

रंग उड़ाती
















रंग उड़ाती, मन को बहलाती
सारे जग को अपने रंग में रंगने होली आई
नीले-पीले, हरे-गुलाबी
कच्चे-पक्के रंगो से भिगोने आई
फागुन के इस रंग में डूबा
टेसू पहन केसरिया बाना
आ धमका प्रकृति को रंगने अपने रंग में
चुलबुल बुलबुल नए राग सुना
सबको खुशियों से भिगोने आई
भूल कर सारे गिले शिकवे
सद्भावनाओं के रंग में रंगने
रंग -बिरंगी होली आई
शोर मचाती, हुल्लड़ करती
मस्तानो कि टोली आई
रंग उड़ाती, मन को बहलाती
रंग-बिरंगी होली आई....
- साधना 

Sunday, March 16, 2014

रंगों का त्यौहार - होली



















बसंतपंचमी के आते ही प्रकृति में एक नवीन परिवर्तन आने लगता है। दिन बड़े होने लगते हैं, जाड़ा कम होने लगता है और पतझड़ शुरू हो जाता है। माघ पूर्णिमा को होली का डांडा गाड़ा जाता है। आम कि मंजरियों पर भौरें मँडराने लगते हैं, वृक्षों में नई  कोपलें फूटने लगती है, और चारों ओर एक नवीनता का अहसास होने लगता है। ऐसे समय पर मनाया जाता है नई उमंग के साथ, रंगों का त्यौहार होली।

होली एक सामाजिक एवं धार्मिक त्यौहार के साथ-साथ रंगों का भी त्यौहार है। इस अवसर पर लकड़ी और कंडों का ढेर लगा कर होलिकापूजन किया जाता है फिर उसे जलाया जाता है। इस पर्व को नवान्नेष्टि यज्ञ भी कहा जाता है। खेत से नए अनाज को लाकर होली कि आग में भूनकर प्रसाद के रूप में दिया जाता है, इस अन्न को होला कहते है।

हिरण्यकश्यपु की बहिन होलिका को वरदान मिला था कि उस पर अग्नि का कोई प्रभाव नहीं होगा। अतः वह विष्णुभक्त प्रह्लाद का अंत करने के विचार से उन्हें गोद में लेकर अग्नि के बीच में बैठ गई पर भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका का अंत हुआ। तभी से त्यौहार मनाने की प्रथा चल पड़ी।

होली एक आनंद और उल्लास का पर्व है। यह सम्मिलन, मित्रता व एकता का पर्व है। इस दिन सभी द्वेषभाव भूलकर सबसे प्रेम और भाईचारे से मिलते है। एकता ,सद्भावना एवं भाईचारा बनाये रखना इस त्यौहार का मूल उद्देश्य एवं संदेश है।

इस दिन अबीर -गुलाल लगा कर सभी एक दूसरे से गले मिलते है। कुछ लोग कीचड़ ,गोबर, मिटटी का प्रयोग कर के एक दूसरे के ह्रदय को चोट पहुचातें है। अतः इन सब का त्याग करना चाहिए। इस दिन आम कि मंजरी और चन्दन को मिला कर खाने का माहात्म्य है। जो लोग फागुन कि पूर्णिमा को हिंडोले में झूलते हुए भगवान के दर्शन करते है ,वे बैकुंठलोक में निवास करते है। अतः हम सभी को पूरे उल्लास व उमंग के साथ इस रंगों से भरे त्यौहार को मनाना चाहिए।
- साधना

Saturday, March 8, 2014

जीवन के दोहरे मापदंड






















जीवन के दोहरे मापदंडों के कारण
नारी अशक्त है 
पुरुष और नारी के लिए
समाज ने अलग-अलग नियम बना
पुरुष को दिया खुला आकाश
और नारी को घुटन भरा जीवन 
पुरुष को हर अपराध माफ़
और नारी को नियम,नीति व संस्कारों का बंधन 
इसीलिए पुरुष अपनी पराकाष्ठाओं को पार कर जाता 
नारी लोकलाज के डर से
सिमट कर कशमकश में डूब जाती 
इन दोहरे मापदंडों को
भूल एक नया मापदंड अपनाना होगा 
ताकि सदियों से चले आ रहे
दोहरे मापदंडों की उलझनों से निकल
हर नारी को मान -सम्मान का जीवन मिल सके
- साधना 

Wednesday, February 26, 2014

महाशिवरात्रि -महोत्सव















        शिवरात्रि का अर्थ है वह रात्रि जो शिव को अतिप्रिय हो, फ़ागुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि कहलाती है। भगवन शिव की पूजा, जागरण और शिवाभिषेक इस व्रत की विशेषता है। चतुर्दशी के तिथि में चन्द्रमा, सूर्य के समीप रहता है। इसी समय जीवन रूपी चन्द्रमा का शिव रूपी सूर्य के साथ योग मिलन होता है। अतः इस चतुर्दशी को शिवपूजा करने से जीवन में अभीष्ट फल प्राप्त होता है।

भगवान शिव संहार और तमोगुण के देवता है। रात्रि संहार काल की प्रतीक है, उसका प्रवेश होते ही हमारी दैनिक क्रियाओं का अन्त हो जाता है और संपूर्ण विश्व निंद्रा में लीन हो जाता है।

शिवरात्रि का कृष्ण पक्ष में होना साभिप्राय ही है। शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा सबल होता है कृष्ण पक्ष में क्षीण। चन्द्रमा के सबल होने पर संसार के सभी रसवान पदार्थों में वृद्धि होती है और क्षय के साथ क्षीणता आती है। सूर्य कि शक्ति से तामसी शक्तियाँ अपना प्रभाव नहीं दिखा पाती हैं, किन्तु चतुर्दशी की अंधकार से भरी रात्रि में वे अपना प्रभाव दिखाने लगती हैं। सभी तामसी वृत्ति के अधिष्ठाता भगवान शिव हैं, इन्हीं तामसी वृत्तियों के प्रभाव को नष्ट करने के लिए चतुर्दशी को शिवाराधना की जाती है। अध्यात्मिक कार्यों में उपवास करना जरुरी माना  गया है। उपवास से ही मन पर नियंत्रण रख कर रात्री जागरण किया जाता है और ॐ नमः शिवाय का जाप किया जाता है।

भगवान शिव अर्धनारीश्वर होकर भी काम विजेता है, गृहस्थ होते हुए भी परम विरक्त है, हलाहल विष-पान के कारण नीलकंठ हो कर भी विष से अलिप्त है, उग्र होते हुए भी सौम्य है, अकिंचन होते हुए भी सर्वेशवर है। भयंकर विषधर  नाग और  सौम्य चंद्रमा उनके आभूषण है ,मस्तक में प्रलयकालीन अग्नि और सिर पर गंगाधारा उनका अनुपम श्रृंगार है। ये सभी विरोधी भाव हमें विलक्षण समन्वय की  शिक्षा देते हैं। इससे विश्व को सह -अस्तित्व अपनाने की शिक्षा मिलती है।

अतः हमें शिवरात्री के महापर्व को बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ समारोहपूर्वक मनाना चाहिए।
- धार्मिक ग्रंथों से प्रस्तुत

Friday, February 21, 2014

छाया बसंत
















आया बसंत, छाया बसंत,
गुनगुनाया निसर्ग
धरती ने ओढ़ी चुनर नई,
कहीं पीली कहीं चटक हरी,
बुलबुल चहकी कोयल कूकी,
कलियों ने घूँघट के पट खोले,
भौंरा हो मदमस्त, गुनगुनाता फिरता,
कभी कुंद तो कभी गुलाब का रस पीता
नन्ही तितली पंख पसारे उड़ती फिरती,
कभी लाल नीले पीले फूलों को तकती
फसलें हवा के झोंकों से,
लरज -लरज लहराती
चटकीली सोने सी चमचमाती धूप,
मन में उत्साह-उमंग जगाती
गुदगुदा जाता हर कवि मन को बसंत,
हर प्रेमी के मन में आस जगाता
प्रस्फुटित हो जाते सुर सारे,
प्रकृति स्वयं राग बसंत गुनगुनाती
आया बसंत छाया बसंत...
- साधना

Monday, February 17, 2014

जीवन की सफलता






















जीवन की सफलताओं का श्रेय हमेशा सही निर्णय लेने वालों को प्राप्त होता है। हर व्यक्ति एक सफल व कामयाब जीवन जीना चाहता है। सही निर्णय लेने कि क्षमता हर व्यक्ति में नहीं होती, पर हम छोटी-छोटी गलतियाँ जीवन में कई बार करते रहते है, ठोकरें खाते है ,कई बार गिरते है फिर सम्हलते है। इस तरह अपनी की हुई गलतियों से सबक सीख कर हम अपने जीवन को जीते हैं। अपनी ही गलतियों की  नींव पर सफल जीवन की इमारत का निर्माण करते है। इन्हीं  की हुई गलतियों से मिला सबक हमारे जीवन का अनुभव व जमा पूंजी माना जाता है। जीवन में जब भी कठिनाइयों का दौर आता है तब हो चुके अनुभवों के आधार पर हम सही निर्णय ले पाते हैं। 

अतः हमें जीवन के अच्छे-बुरे अनुभवों का सूक्ष्मता से निरीक्षण करते हुए जीवन को सफलता की राह पर अग्रसर करते हुए अपना जीवन सफल बनाना चाहिए।
- साधना