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Sunday, April 21, 2013

जीवन-मृत्यु

Flying bird
जीवन -मृत्यु पंछी के दोनों पंखो के समान है 
जीवन के आते ही मृत्यु का दिन निश्चित हो जाता है 
जीवन में आते ही मिलता है प्यार-दुलार,
आशा-निराशा, कभी खुशी कभी गम,
कहीं माता -पिता का प्यार कभी भाई-बहन का स्नेह, 
कहीं पति-पत्नी का पवित्र रिश्ता, 
लेकिन एक दिन अचानक पंछी का
दूसरा पंख फड़फड़ाने लगता,
और जीवन-मृत्यु में बदल जाती,
सारे बंधनों से आत्मा मुक्त हो जाती,
और हो जाती अनंत में विलीन,
पीछे रह जाती है सिर्फ यादें... 
- साधना

Friday, November 16, 2012

मुक्ति बन्धन

मेरे घर में एक सुंदर सुनहरा सा पिंजरा है  
उसमे एक प्यारा सा चिड़ियों का जोड़ा है
दोनों चिड़िया दिन भर फुदकती, झूलती, चहचहाती, 
अच्छा सा दाना-पानी खाती पीती और मस्ती में डूब जाती,
पिंजरे में अपने पंखों को फड़फड़ाती,
मुक्त होने की चाह में इधर-उधर पिंजरे से टकराती,
मैंने उन्हे बहुत समझाया, बाहर की दुनिया बहुत निर्मम है,
वहाँ न दाना है न पानी, चारों तरफ दुश्मन ही दुश्मन व परेशानियाँ है,
पर  जब भी मौका मिलता, मुक्त होने की चाह में,
पिंजरा खुलते ही फुर्र हो जाती...
मुक्त गगन में अपना अस्तित्व बनाने की चाह में उड़ जाती...

- साधना