Showing posts with label Aakash. Show all posts
Showing posts with label Aakash. Show all posts

Friday, April 14, 2017

मुक्ति की चाह


हर पल मुक्ति की तलाश में भटकता मन
कभी पर्वत की गगनचुम्बी शिखर पर,
कभी झिलमिलाते सितारों से भरे आसमान में,
तारों की झंकार सुन भटक जाता मन,
थक जाती रात और झिलमिल सितारे,
सुनकर आहट चहचहाते पक्षियों की लौट जाती रात,
सो जाते सितारे भोर के सूरज के आने से पहले,
मैं अपनी मुक्ति की राह देखती रहती, सुबह की सुनहरी धूप से 
चमकते गगनचुम्बी शिखरों की ओर अपनी बाहें फैलाए...

- साधना 'सहज'

Thursday, July 25, 2013

मेरा पागल मन

Psalm 34:18 (Clouded Heart)

मेरा पागल मन जो उड़ा करता है
सुनहरे पंखो पर होकर सवार,
आकाश को छू कर, फिर ज़मी पर भी चलता है
सबसे आगे भीड़ में बार-बार,
आसमान से जमीं तक की ऊँचाइयों को
बार-बार नाप कर बन जाता है इस प्रकृति का राज़दार
सूरज, चाँद, सितारों को हमजोली बना
उनके साथ करता कही अनकही बातें,
कभी हमजोली बन खेलता, कभी झगड़ता, कभी मान भी जाता
चांदनी रातो में सो कर खो जाता सुनहरे सपनो में,
सुबह होने पर सूरज गुदगुदा कर उठाता,
देखने के लिए  फिर से नए स्वपन
और जानने के लिए नए-नए राज़…

 - साधना

Sunday, April 21, 2013

जीवन-मृत्यु

Flying bird
जीवन -मृत्यु पंछी के दोनों पंखो के समान है 
जीवन के आते ही मृत्यु का दिन निश्चित हो जाता है 
जीवन में आते ही मिलता है प्यार-दुलार,
आशा-निराशा, कभी खुशी कभी गम,
कहीं माता -पिता का प्यार कभी भाई-बहन का स्नेह, 
कहीं पति-पत्नी का पवित्र रिश्ता, 
लेकिन एक दिन अचानक पंछी का
दूसरा पंख फड़फड़ाने लगता,
और जीवन-मृत्यु में बदल जाती,
सारे बंधनों से आत्मा मुक्त हो जाती,
और हो जाती अनंत में विलीन,
पीछे रह जाती है सिर्फ यादें... 
- साधना

Tuesday, January 22, 2013

नीतिकथा (कछुआ और गरुड़)

The Tortoise and the Birds - Richard Heighway
एक कछुआ यह सोचकर बहुत दुखी होता था कि वह उड़ नहीं सकता। एक दिन वह गरुड़ पक्षी के पास गया और बोला- मुझे उड़ने की बहुत इच्छा है, अगर तुम मुझे उड़ना सीखा दो तो मैं समुद्र के सारे रत्न निकाल कर तुम्हें दे दूँगा। गरुड़ ने कछुए को बहुत समझाया कि तुम इस इच्छा को त्याग दो, तुम नहीं उड़ पाओगे पर कछुआ नहीं माना।

उसने कहा नहीं उड़ सका तो गिर कर मर जाऊँगा लेकिन एक बार उड़ना चाहता हूँ। गरुड़ ने हँसकर कछुए को उठा लिया और काफी ऊँचाई पर पहुँचा दिया और कहा- अब उड़ना शुरू करो। यह कहकर कछुए को छोड़ दिया, उसके छोड़ते ही कछुआ पहाड़ी पर गिरा और उसके प्राण निकाल गए इसलिए हमें अपनी क्षमता के अनुरूप ही इच्छा रखनी चाहिए अन्यथा बहुत दुख उठाना पड़ता है। 


(संत ईसप की नीतिकथाओं से प्रस्तुत)

Tuesday, December 11, 2012

आकाश

Moon in Sunrise Sky
आकाश अनंत है उस अनंत में चाँद, सूरज
और टिमटिम चमकते बहुत सारे सितारे है,
आकाश की नीली आभा को देख मन प्रफुल्लित हो जाता है, 
कभी सिंदूर सा लाल हो मन में उमंग जगाता है, 
तो कभी मटमैला-सा होकर निराशा का भाव जगाता है,
आकाश सिर ऊँचा उठाकर जीने की कला सिखाता है,
तमाम भेद-भावों को भुलाकर अपने आप में लीन होना सिखाता है,
मासूम नन्हें बच्चों को परीलोक का आभास दिलाता है,
आकाश में बादलों से बनी आकृतियों को देखकर
बच्चों के मन में जिज्ञासा का भाव जागता है,
वही युवाओं की आँखों में नए-नए स्वप्न जगाता है,
मन को पंछियों की तरह कल्पना की ऊँची उड़ान भरना सिखाता है,
और मोक्ष की इच्छा रखने वाले 
बुजुर्गों को शांति का एहसास कराता है...
- साधना