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Thursday, November 13, 2014

तमस से भरी रात













तमस से भरी, लम्बी रात के बीत जाने के बाद 
सृष्टि करती लालिमा से भरे सूर्य के उदय होने का इंतजार 
नन्ही बुलबुल, अलसाते पशु-पक्षी, विशाल वृक्ष,
नाजुक लताएँ तकती रहती सूर्य की और,
सूर्य कुछ अनमना हो निकल पड़ता 
बादलों की ओट से फिर धीरे-धीरे धधकती अग्नि का गोला बन 
चारों और फैला देता नवजीवन का प्रकाश 
पर आकाश में सूर्य सदा अकेला अनमना सा रहता 
उसके धधकते मन में सदा बना रहता गहन अंधकार 
- साधना 

Saturday, April 13, 2013

एक आस...


दरवाजे पर पुष्प लिए कब से खड़ी हूँ माँ,
तुम्हारे सुंदर सलोने मुखड़े की आस में,
तुम्हारी पायल की मधुर रुनझुन सुनने को,
माँ तुम सदा-सदा के लिए सुख-समृद्धि बरसाने को आ जाना,
मेरा आँचल जो मैं तुम्हारे सामने फैला कर खड़ी हूँ,
उसमें बसी हर आस को तुम्हें अर्पित करती हूँ,
तुम मेरी हर आशा को विश्वास के साथ उजव्वल व आभामय बना देना,
ताकि मेरा संसार और भी आभामय हो जाए।
- साधना

Wednesday, January 23, 2013

सूना जीवन

Walking
सूना-सूना जीवन है उदास राहें,
एक धुंधला सा स्वप्न जो मेरी आँखों में है,
वहीं जहाँ मेरी आशाएँ बसती है,
अंधकार में झरते हुए झरने की तरह,
जहाँ तुम और तुम्हारी यादें बसती है,
मेरे अंतर मन की पुकार आकाश में गूंज बनकर मौन हो जाती है,
मेरा जीवन बसता है तुम्हारे इंतज़ार में कभी इस पार कभी उस पार... 
- साधना 

Saturday, January 19, 2013

इंतज़ार

(wait) / wallpaper
उस दिन ठिठुरा देने वाली ठंड थी,
बाहर कोहरा छाया हुआ था,
सन्नाटे के अलावा बाहर कुछ भी न था,
अचानक लगा बाहर आहट हुई किसी के आने की,
कौवा छत पर बैठ कांव-कांव कर किसी 
के आने का संदेश दे रहा था,
आँखें इंतज़ार कर रही थी किसी आगंतुक का,
मन बेचैन हो कागा का स्वर सुन रहा था,
सर्द थपेड़े शरीर को काँपने पर मजबूर कर रहे थे,
अलाव की आग भी ठंडी हो चली थी,
पर मन नहीं मान रहा था...
ये इंतज़ार था एक बूढ़ी माँ का,
जिसका बेटा सरहद पर देश की रक्षा कर रहा था
- साधना