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Tuesday, April 2, 2019

जिंदगी...

                     
 


जिंदगी देती हैं हमें बहुत प्यारी और खुशनमा चीज़ें,
सुमधुर संगीत समुन्दर की लहरों-सा,
सूरज की तपन के बाद मिट्टी से उठती सौंधी महक,
खुला अनंत तक फैला आसमान,
चहचहाते पक्षी, चाँद-तारों से भरी रात,
नज़र भर कर इन सब खुशनुमा चीज़ों के साथ,
सजाते हम अपने सुनहरे ख्वाब,
क्लेश और कलह से भरे जीवन से तो
बेहतर है प्रकृति का साथ
पलभर के लिए भूलकर
उलझनों से भरे इस जीवन को
झूम उठो प्रकृति के साथ...

-- साधना 'सहज'


Tuesday, July 11, 2017

थक सा गया है चाँद...


बादलो से लुकाछुपी करता थक सा गया है चाँद,
कभी पूर्ण आभा से दमकता दिख जाता,
पल भर में मटमैला-सा हो जाता,
चलता रहता रात-भर सितारों के बीच,
कुछ कहता, कुछ सुनता सा,
इस छोर से उस छोर तक,
चलता रहता बिना आराम किए,
पर भोर के उजियारे के आने पर,
 मुरझा-सा जाता चाँद,
फिर थक कर उषा की झोली में,
पुनरागमन के लिए सो जाता चाँद... 

-- साधना 'सहज' 

Friday, January 24, 2014

प्रकृति का श्रंगार

Night sky

साँझ ढलने के बाद,
धीरे -धीरे नीलगगन में,
टिमटिमाने लगते रेशमी डोर से लटके हुए नटखट तारे,
उज्जवल-सा चाँद बिखेरता दूधिया सी रोशनी।
मखमली श्वेत सितारों से भरी चुनर ओढ़ कर,
स्वच्छ निर्मल चाँदनी में डूबती उतराती प्रकृति
करती नई सुबह का इंतजार।
- साधना 

Thursday, July 25, 2013

मेरा पागल मन

Psalm 34:18 (Clouded Heart)

मेरा पागल मन जो उड़ा करता है
सुनहरे पंखो पर होकर सवार,
आकाश को छू कर, फिर ज़मी पर भी चलता है
सबसे आगे भीड़ में बार-बार,
आसमान से जमीं तक की ऊँचाइयों को
बार-बार नाप कर बन जाता है इस प्रकृति का राज़दार
सूरज, चाँद, सितारों को हमजोली बना
उनके साथ करता कही अनकही बातें,
कभी हमजोली बन खेलता, कभी झगड़ता, कभी मान भी जाता
चांदनी रातो में सो कर खो जाता सुनहरे सपनो में,
सुबह होने पर सूरज गुदगुदा कर उठाता,
देखने के लिए  फिर से नए स्वपन
और जानने के लिए नए-नए राज़…

 - साधना