*आप सभी को मकर संक्रांति के हार्दिक शुभकामनाएं*

हे सूर्य देवता! तुम सतरंगी अश्वों से सुसज्जित
रश्मि रथ पर सवार हो आ जाना,
मेरे जीवन प्रभात को और भी निर्मल और उज्ज्वल बना देने के लिए,
मैं तुम्हारी इस सुनहरी रोशनी में गुनगुनाते हुए
नहा कर पवित्र होना चाहती हूँ
मेरी चेतना के सभी सोए हुए स्वरों को जगाना चाहती हूँ
मैं जीवन के इस विजयपथ पर आगे बढ़कर,
अपने जीवन को गतिशील व कर्मठ बनाना चाहती हूँ
ताकि चारों और फैले हुए आनंद के गहरे समुद्र में
डूबकर श्रेष्ठता को प्राप्त कर सकूँ....
-- साधना 'सहज'
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